नौकरियां और लोन देने में दरियादिली दिखाएंगे बैंक!
नई दिल्ली. त्योहारी सीजन के दौरान सरकार ने आम लोगों को राहत देने की कोशिश की है। वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने गरीब लोगों को आसानी से लोन दिए जाने की वकालत की है वहीं सरकारी बैंकों में बड़े पैमाने पर भर्तियां शुरू हो रही हैं और ये बैंक अब एसी, फ्रिज, टीवी आदि जैसे सामानों के लिए भी कर्ज देंगे।
चिदंबरम ने कहा है कि बैंक और वित्तीय संस्थान गरीबों को लोन देने में कोताही नहीं बरतें क्योंकि वे लोन लेने के बाद समय पर ब्याज और मूलधन की अदायगी करते हैं ताकि उन्हें आसानी से फिर लोन मिल सके। यदि उन्हें औपचारिक चैनल से लोन नहीं मिलता है तभी वे सूदखोरों के चंगुल में फंसते हैं और कम से कम 60 फीसदी सालाना ब्याज चुकाते हैं। फेरी लगाने वाले तो 3,650 फीसदी का सालाना ब्याज चुकाते हैं।
श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की सोशल ऑडिट रिपोर्ट 2010-12 जारी करने के अवसर पर मंगलवार को चिदंबरम ने कहा कि समृद्ध लोगों को चाहे 1000 करोड़ रुपये का लोन भी क्यों नहीं चाहिए, आसानी से मिल जाता है। उन्हें लोन देने के लिए बैंक खुद उनके पास जाते हैं, जबकि गरीब व्यक्ति लोन लेने के लिए बैंक के चक्कर काट-काटकर थक जाते हैं और उन्हें लोन नहीं मिलता है। वित्त मंत्री के मुताबिक, भारत के गरीबों का लोन अदायगी के मामले में रिकॉर्ड खराब नहीं है। देश के गरीब लोन चुकाने के मामले में ईमानदार हैं, अत: उनको जरूर लोन दिया जाना चाहिए। वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कोई कॉरपोरेट हाउस समय पर लोन चुकाने में असमर्थ होता है तो वैसे में बैंक को दिक्कत होती है, लोन लेने वाले को कभी नहीं। लेकिन यदि कोई गरीब लोन चुकाने में डिफॉल्टर हो जाए तो बैंक को कुछ नहीं होता है, बल्कि लोन लेने वाला परेशान होता है।
चिदंबरम ने कहा, 'गरीबों को काम करने के लिए फिर लोन लेने की जरूरत पड़ती है और ऐसा तभी होगा जब उनका लोन चुकाने का रिकॉर्ड बेहतर होगा। चाहे स्वयं सहायता समूह (सेल्फ हेल्प ग्रुप) की बात हो या फिर एजुकेशन लोन की, मैंने देखा है कि गरीब लोन की सर्विसिंग बेहतर तरीके से करते हैं।'
चिदंबरम ने कहा कि अभी तक देश की 60 फीसदी आबादी के पास किसी भी प्रकार का फाइनेंशियल प्रोडक्ट नहीं पहुंचा है, इसलिए सरकार विभिन्न तरीकों को आजमा कर उन्हें वित्तीय समावेश कार्यक्रम में शामिल करना चाहती है।
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