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26/11 : पाकिस्तानी अदालत नहीं मानती भारत के दिए सबूत


इस्लामाबाद। मुंबई पर 26/11 को हुए हमले के संबंध में भारत द्वारा दिए गए सबूतों को पाकिस्तान की अदालत स्वीकार नहीं करती। पाकिस्तान सरकार ने भारत को यह जानकारी दी है। यह भी बताया है कि अदालत इसलिए नहीं मानती क्योंकि न्यायिक आयोग को भारतीय अधिकारियों और गवाहों से जिरह नहीं करने दी गई।

इधर, नई दिल्ली में गृह सचिव आरके सिंह ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तानी आयोग को जिरह की अनुमति दी जा सकती है। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने बताया कि नई दिल्ली ने मुंबई हमले के संबंध में जो सबूत दिए थे वे पाकिस्तान की अदालत में मान्य नहीं हैं। ये सबूत पाकिस्तान से आए न्यायिक आयोग को दिए गए थे।

पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने बताया कि इनके आधार पर लश्करे तैयबा के संस्थापक जकी-उर रहमान लखवी सहित सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। इससे पहले 28 जुलाई को रावलपिंडी की आतंकरोधी अदालत ने ये सबूत मानने से मना कर दिया था। उसका कहना था कि पाकिस्तान से गए आयोग ने संबंधित भारतीय अधिकारियों और गवाहों से सवाल जवाब नहीं किए। उन्हें जो दे दिया गया लेकर चले आए। इसलिए इन्हें सबूत नहीं माना जा सकता।

केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने बताया कि अगर पाकिस्तान ने आग्रह किया तो उस पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग से कहा गया है कि वे पाकिस्तान के अधिकारियों से संपर्क करें। उनसे पूछे कि मुंबई हमले के गुनहगारों पर मुकदमा चलाने के लिए वे हमसे क्या चाहते हैं।

केंद्रीय गृह सचिव सिंह ने कहा, ‘एक बार हमें पता चले कि वे क्या चाहते हैं। तब उनके आग्रह पर विचार किया जा सकता है। अभी तक कोई आग्रह नहीं मिला है।’ उन्होंने कहा कि सभी बयान मान्य हैं क्योंकि वे मजिस्ट्रेट ने लिए हैं।

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